भारत बंद का दिख रहा मिलाजुला असर, ई-वे बिल कानूनों के विरोध में कर रहे हैं विरोध
India bandh seen mixed effects, protesting against e-way bill laws

भारत बंद का दिख रहा मिलाजुला असर, ई-वे बिल कानूनों के विरोध में कर रहे हैं विरोध

नई दिल्‍लीः ई-वे बिल कानूनों के विरोध में देश व्‍यापारियों और उनसे जुड़े कुछ बड़े संगठनों ने आज यानी 26 फरवरी को भारत बंद का ऐलान किया है। इनकी मांग है कि वस्‍तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के क्रियान्‍वयन और प्रणाली को आसान बनाया जाए। इसके लिए कंफेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की ओर से भारत बंद बुलाया गया है। इसे अब ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेल्फेयर एसोसिएशन का भी समर्थन मिला है। ऐसे में देश के शहरों में इसका मिलाजुला असर दिख रहा है।

शहर में सड़कों पर इस दौरान सन्‍नाटा पसरा है। संगठनों की ओर से कहा गया है कि देश भर के सभी बाजार बंद रहेंगे और सभी राज्यों के अलग-अलग शहरों में धरना प्रदर्शन होगा। सभी राज्य स्तरीय-परिवहन संघों ने भारत सरकार की ओर से पेश किए गए नए ई-वे बिल कानूनों के विरोध में कैट का समर्थन किया है।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर के अलावा बड़ी संख्या में व्यापारिक संगठनों ने भी व्यापार बंद करने का समर्थन किया है. इसमें ऑल इंडिया एफएमसीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स फेडरेशन, फेडेरेशन ऑफ एल्‍युमिनियम यूटेंसिल्‍स मैन्यूफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन, नॉर्थ इंडिया स्पाईसिस ट्रेडर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया वूमेंन एंटेरप्रैन्‍योर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया कंप्‍यूटर डीलर एसोसिएशन, ऑल इंडिया कॉस्मेटिक मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन शामिल हैं।

कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। कैट का दावा है कि भारत व्यापार बंद में 40,000 से अधिक व्यापारिक संगठनों के आठ करोड़ व्यापारी शामिल होंगे। वहीं कुछ अन्य व्यापारी संगठनों ने कहा कि वे बंद का समर्थन नहीं कर रहे हैं। कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा है कि सभी राज्यों के 1,500 बड़े और छोटे संगठन जीएसटी संशोधन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवाओं मसलन दवा की दुकानों, दूध और सब्जी की दुकानों को बंद से बाहर रखा गया है।